शिमला। बजट भाषण पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए आज 22 फरवरी गुरुवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे SMC व कंप्यूटर शिक्षकों के मामले पर पलटपार करते हुए भाजपा को निशाने पर लिया । उन्होंने सदन में कहा कि ये मामला 12 सालल पुराना है और प्रदेश में दिसंबर 2017 से 2022 तक भाजपा की जयराम सरकार की सत्ता में रही । लेकिन तत्कालीन जयराम सरकार इन शिक्षकों की मांगों को लगातार टालती रही हैं। केवल व केवल आश्वासन दिए जाते रहे।आज सदन में विपक्ष इनके मामले को उठा रहा हैं।
सुक्खू ने कहा कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया व अदालतों से आदेश पारित हुए हैं। सुक्खू ने कहा कि उनकी सरकार इन शिक्षकों के मसले पर पूरी तरह से गंभीर हैं और सरकार की गंभीरता इस बात प्रकट होती है कि इस मसले को सुलझाने के लिए कैबिनेट की सब –कमेटी का गठन किया और इस कमेटी ने अपना रपट सौंप दी हैं जो सरकार को मिल गई हैं।
सुक्खू ने सदन में कहा कि सरकार इस रपट का अध्ययन करने के बाद इन शिक्षकों के मसले पर फैसला लेगी।
याद रहे
एसएमसी शिक्षकों के मसले पर सुक्खू सरकार ने जून जुलाई 2023 में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्ध्यक्षता में तीन मंत्रियों की सब कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी शामिल थे। इस समिति को 31 दिसंबर2023 तक अपनी रपट सौंपनी थी।
लेकिन इन तीनों ही जवान मंत्रियों की अोर से 31 दिसंबर तक कोई बैठक ही नहीं की गई।
इसके बाद एसएमसी शिक्षक सड़कों पर उतर आए तो इन युवा मंत्रियों को बैठक करने की याद आई और अब इन्होंने अपनी रपट भी सौंप दी हैं।उधर, एसएमसी शिक्षक लंबे अरसे से राजधानी में तंबू लगाकर क्रमिक अनशन पर बैठे हुए हैं। 19 फरवी को इन्होंने राजधानी में बड़ा प्रदर्शन भी किया था।
लेकिन एक बार फिर से मुख्यमंत्री ने इनको सदन से भरोसा दिलाया है कि रपट आ चुकी है और अध्ययन करने के बाद फैसला ले लिया जाएगा।
याद रहे विपक्षी पार्टी भाजपा की ओर से सदन में चर्चा के दौरान इस मसले को उठाया गया था व सरकार की इस बात के लिए आलोचना की गई थी कि उसने इन शिक्षकों के लिए कोई नीति नहीं बनाई।
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