शिमला। पावर कारपोरेशन के पूर्व चीफ इंजीनियर विमल नेगी की रहस्यमय मौत के मामले में जांच कर रही सीबीआई ने शिमला के पूर्व एसपी संजीव गांधी से पूछताछ के लिए सम्मन जारी किया था।संजीव गांधी को बीते रोज यानी छह मार्च को सीबीआइ के सीजीओ परिसर लोधी रोड़ परिसर स्थित कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। ये सम्मन दो मार्च को भेजा गया था।
विमल नेगी की रहस्यमय मौत के मामले की जांच कर रहे सीबीआई के डीएसपी ब्रिजेंद्र प्रसाद सिंह ने भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएसएस की धारा 179 के तहत मुख्यमंत्री सुक्खू सिंघम आईपीएस संजीव गांधी को ये सम्मन भेजा।
डीएसपी सिंह ने सम्मन में लिखा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आप इस मामले की परिस्थितियों से वाकिफ रहे हैं और वह यानी डीएसपी सिंह इस मामले की जांच कर रहे हैं।सम्मन में कहा है कि इस मामले को लेकर उनसे (संजीव गांधी)कुछ सवालों के जवाब सुनिश्चित किए जाने है।
याद रहे सीबीआइ ने विमल नेगी की रहस्यमय मौत मामले में बीएनएस की धारा 108,3(5) यानी (आत्महत्या के लिए उकसाने का)के तहत मामला दर्ज कर रखा है।लेकिन सीबीआई की ओर से इस मामले में अभी तक ज्यादा कुछ सामने नहीं लाया गया है।
इस मामले में एक आरोपी पावर कारपोरेशन के पूर्व डायरेक्टर इलेक्ट्रिकल देशराज की जमानत की सुनवाई के दौरान सीबीआइ के अफसर को अदालत में भारी फटकार लगी थी।
याद रहे, पिछले साल 10 मार्च 2025 को विमल नेगी शिमला से बिलासपुर के लिए गए थे व तब से वो लापता हो गए। उसके बाद 18 मार्च को उनकी लाश तलाई में दरिया से मिली थी। उनके परिवार वालों ने इसे कत्ल करार दिया था। बाद में इस मामले की जांच शिमला पुलिस ने की थी व तत्कालीन एसएसपी शिमला संजीव गांधी ने इस मामने में एसआइटी गठित की थी।
इस मामले को भाजपा ने जमकर उछाला था तो इस मामले की जांच सीबीआइ से कराने के लिए खूब हल्ल मचाया था। दिवंगत नेगी के परिजनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। अदालत में सुक्खू सरकार के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व आईएएस ओंकार शर्मा और तत्कालीन डीजीपी आइपीएस अतुल वर्मा की दायर रपटों ने पावर कारपोरेशन के कारनामों को रोशनी में लाकर सनसनी फैला दी थी। अतुल वर्मा की रपट ने तो पुलिस जांच को ही कटघरे में खड़ा कर दिया था। ये दीगर है कि अतुल वर्मा तत्कालीन एसपी संजीव गांधी से किसी मामले को लेकर तमतमाए हुए थे।
इसके बाद प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच को सीबीआई के सुपुर्द करने के आदेश जारी कर दिए थे । लेकिन सीबीआई की जांच से भी लोगों को निराशा ही हाथ लगी खासकर जब इस मामले में आरोपी देशराज की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगा दी।
इस मामले में दूसरे बड़े आरोपी पावर कारपोरेशन के तत्कालीन एमडी आईएएस हरिकेष मीणा है जो अब निदेशक खेल विभाग का जिम्मा संभाल रहे है। वो भी सुक्खू के लाडले अफसरों में शुमार थे।
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