शिमला।अदाणी पावर लिमिटेड की ओर से 960 मेगावाट की जंगी थोपन पन बिजली परियोजना के आवंटन के मौके पर नीदरलैंड की कंपनी ब्रेकल कारपोरेशन एनवी की ओर से जमा कराई अप फ्रंट मनी की 280 करड़ रुपए को रकम 18 फीसद ब्याज सहित लौटाने को लेकर दायर याचिका में पार्टी बनने की ब्रेकल के पूर्व निदेशक अनिल वाहल की अर्जी का प्रदेश सरकार और अदाणी पावर दोनों ने विरोध किया है। एकल न्यायाधीश न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की एकल पीठ में आज इस मामले की सुनवाई हुई और अदाणी पावर और वाहल की ओर से अपनी ओर से और पक्ष रखने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा गया । अदालत ने तीन सप्ताह का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 15 नवंबर को निर्धारित की है।
पिछली सुनवाई पर न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने राज्य सरकार और अदाणी पावर लिमिटेड को वहल की अर्जी की सुनवाई करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया है। अपने जवाब में राज्य सरकार ने कहा कि उनका अनिल वहल से कोई लेना-देना नहीं है,। वह इस मामले में व्यक्तिगत तौर पर पार्टी बनना चाहते है। इस मामले में सरकार का उनसे कोई संबध नहीं है। परियोजना के रदद होने के बाद 12 साल बाद वह पक्ष बनने के लिए आवेदन कर रहे है वह भी व्यक्तिगत तौर पर। उनकी अर्जी को खारिज किया जाए ।
अदानी पावर की ओर से यह कहा गया है कि अनिल वहल को वर्तमान याचिका में पक्षकार होने का कोई अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट में दायर अपने जवाब में अदानी पावर ने कहा कि 24 अगस्त 2013 के अपने पत्र में ब्रेकेल कॉर्पोरेशन एनवी ने राज्य सरकार को अदानी पावर लिमिटेड को सीधे राशि वापस करने को लेकर अवगत कराया था और राज्य सरकार को भेजी चिटठी में कहा था कि “हमें कोई आपत्ति नहीं है अगर राशि का भुगतान सीधे अदानी पावर लिमिटेड के खाते में किया जाता है और भविष्य में कभी भी इस पर हमारा कोई अधिकार या दावा नहीं होगा।”
याद रहे अपनी याचिका में मेसर्स अदाणी पावर लिमिटेड ने उसे 280.69 करोड़ का अपफ्रंट प्रीमियम वापस करने का आग्रह किया है । अपनी याचिका में अदाणी पावर ने कहा कि जब 2006-07 में ब्रेकेल एनवी को 960 मेगावाट जलविद्युत परियोजना आवंटित की गई थी। तो उसने अप फ्रंट मनी के रूप में 280 करोड़ रुपए जमा कराए थे।
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