शिमला। पिछले पांच सालों में मोदी सरकार देश के किसानों पर कहर बरपाती आ रही हैं। ये खुलासा कहीं और नहीं मोदी सरकार के कृषि मंत्रालय की साल 2022-2023 के लिए ‘खाता एक नजर में’ शीर्षक से कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी एक रपट में हुआ हैं।
जानकारी के मुताबिक मोदी सरकार में 2018-19 में कृषि मंत्रालय के लिए 54000 करोड़ रुपए का आवंटन हुआ था। इसमें 21 हजार 43 करोड़ 75 लाख रुपया खर्च ही नहीं हुआ।
इसके बाद भी 2019-20 में 34 हजार 517 करोड़ 70 लाख रुपए, 2020-21 में 23हजार 824करोड़ 53 लाख,2021-22 में 5152 करोड़ और 2022-23 में 21 हजार 5 करोड़ खर्च नहीं किया गया। बजट में किसानों के हित के लिए आंवटित ये रकम लैप्स हो गई। इस तरह एक लाख 5 हजार 543 करोड़ 71 लाख रुपए की ये रकम पांच सालों में लैप्स होती गई और देश में किसान तड़पता रहा।
यही नहीं मोदी सरकार ने 2023-24 के केन्द्रीय बजट में उत्तर-पूर्वी राज्यों में हरित क्रान्ति के लक्ष्य जिसे एक प्रमुख योजना के तौर पर विज्ञापित किया गया है और जिसके लिए वर्ष 2021-22 में 6हजार747 करोड़ रूपये आवंटित किये गये थे उसमें 2022-23 व 2023-24 में कोई बजट ही आवंटित नहीं किया गया ।
इसके अलावा राष्ट्रीय कृषि विकास के मद में भारी कटौती करते हुए बजट को 10हजार 433 करोड़ से घटाकर 7 हजार 150 करोड़ कर दिया गया है। प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना के बजट को 2022-23 के 12हजार 954 करोड़ से घटाकर 2023-24 में 10 हजार 787 करोड़ कर दिया गया है।
यही नहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में भी 2022-23 से कोई वृद्धि नहीं की गई है। इसका आवंटन 60 हजार 000 करोड़ है। यदि सस्कार के 12 करोड़ लाभन्वितों के दावे को मान भी लिया जाये तो कम से कम 72 हजार करोड़ का आवंटन होना चाहिये था। यहां तक कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के मद में भी 2022-23 के बजटीय अनुमान 15हजार 500 करोड़ की तुलना में 2023-24 के बजट में केवल 13हजार 625 करोड़ रूपये रखे गये है।
महत्वपूर्ण बाजार हस्तक्षेप और मूल्य समर्थन योजना के लिए 2022-23 में आवंटित 1500 करोड़ को 2023-24 के बजट के संशोधित अनुमान में कोई स्थान नहीं मिला है। कृषि अनुसंधान के लिए रखे गये 842 करोड़ रूपये भी लैप्स हो गए हैं।
किसान सभा ने बताया अपराध
किसानों के लिए रखी इतनी बड़ी रकम का पांच सालों में लैप्स हो जाने को अखिल भारतीय किसान सभा और हिमाचल किसान सभा ने अक्षम्यअपराध करार दिया हैं।
अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष अशोक ढ़वले और महासचिव विजू कृष्णन के अलावा हिमाचल किसान सभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह तंवर और महासचिव होतम सौंखला ने कहा है कि इस कृत्य से नरेन्द्र मोदी नीत भाजपा सरकार के संकटग्रस्त किसानों के प्रति असंवेदनशील होने तथा खेती को कॉरपोरेटों को सौंप देने के उसके असली इरादों का पर्दाफाश हुआ है।
इस 1 लाख करोड़ रुपए को तब वापिस या लैप्स किया गया है जब किसान कृषि, आधार भूत ढांचे के विकास, सिंचाई के विस्तार, लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए समर्थन मूल्य व शोध व विस्तार के लिए पैसे की मांग कर रहे हैं। कृषि, पशुपालन व खाद्य प्रस्संसकरण पर स्थायी समिति ने यह चिहिन्त किया है कि इस तरह से कृषि मद के पैसे के समपर्ण का बुरा असर उत्तर-पूर्वी राज्यों, अनुसूचित जाति उपयोजना तथा अनुसूचित जनजाति उपयोजना पर पड़ेगा।
सभा ने कहा कि यह आपराधिक कृत्य ऐसे समय किया गया है जब संकट में फंसे किसानों की आत्महत्याएं लगातार जारी है और चावल के उत्पादन में बड़ी कमी होने की रिर्पोट आ रही है।
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