शिमला।कांग्रेस की सुखविंदर सिंह सरकार 2024 की तरह ही इस बार भी राज्यसभा के लिए प्रदेश से किसी कांग्रेस नेता को प्रत्याशी खड़ा न कर कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल को राज्यसभा भेजने की मंशा तय कर चुकी है।रजनी पाटिल मूलत: महाराष्ट्र से हैं।
जबकि दूसरी ओर सुक्खू कैबिनेट में खाली मंत्रियों के पदों को भरने के लिए भी पूरी तैयारी हो चुकी है। इस बावत कुल्लू से पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सुंदर ठाकुर और ज्वालामुखी से कांग्रेस विधायक संजय रतन के नाम लगभग -लगभग फाइनल हो चुके है। हालांकि घोषणा होने तक कहीं कुछ गड़बड़ हो जाए तो वो अलग बात है। इनमें से सुंदर ठाकुर को कैबिनेट व संजय रतन को डिप्टी स्पीकर का ओहदा मिलना लगभग तय है।
आज 31 जनवरी 2026 को राजधानी में रजनी पाटिल और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ठाकुर के बीच मुलाकात हुई। मुलाकात के दौरान उप मुख्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री,मंत्री अनिरुद्ध सिंह और यादविंदर सिंह गोमा भी हाजिर रहे। lसाथ में पार्टी के अध्यक्ष विनय कुमार को भी भरोसे में लिया गया।
कहा जाता है कि मुलाकात के दौरान कैबिनेट में मंत्री पद को भरने को हामी भर दी गई जबकि रजनी पाटिल को हिमाचल से राज्यसभा भेजने को लेकर मंथन हुआ। याद रहे कि दलित चेहरे विनय कुमार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के बाद से विधानसभा में डिप्टी स्पीकर का पद भी अभी भरा जाना है।
सुंदर ठाकुर एक अरसे से कैबिनेट में शामिल किए जाने के लिए दबाव बनाए हुए है और आस भी लगाए हुए थे उधर, कभी हालीलाज कांग्रेस के सिपहसलार रहे संजय रतन लंबे समय से सुक्खू खेमे के साथ चहलकदमी कर रहे है।संजय रतन पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेहद करीबी नेता रहे है लेकिन अब वो सुक्खू के साथ कदमताल करते नजर आ रहे है।
रजनी पाटिल को राज्यसभा भेजने के कदम के पीछे सुक्खू सरकार व कांग्रेस आलाकमान भाजपा को एक बार फिर से लोटस टू अंजाम देने की चुनौती देने की मूड़ में है। हालांकि मुख्यमंत्री सुक्खू ने भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नडडा के अलावा नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को अलग-अलग चैनल्स के जरिए आइने में उतारा हुआ है जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री व सुख्कू के पुराने सखा अनुराग ठाकुर व उनके पिता प्रेम कुमार धूमल पहले ही आंतरिक तौर पर सुक्खू के करीबी है। सब जानते है कि धूमल परिवार व सुक्खू खेमे का सबसे बड़ा एजेंडा ही हालीलाज कांग्रेस को ठिकाने लगाने का है।
उधर, पिछली बार कांग्रेस से भाजपा में गए हर्ष महाजन को राज्यसभा भेजने में मदद करने वाले तत्कालीन कांग्रेस विधायकों की अब भाजपा में वो जगह नहीं है जो कांग्रेस में हुआ करती थी। कांग्रेस आलाकमान और सुक्खू को लगता है कि अब कोई कांग्रेस विधायक दोबारा से इस तरह की गलती करने की कोशिश नहीं करेगा। लेकिन अंदरखाते कांग्रेस के विधायक व मंत्री खुद सुक्खू से नाराज चले हुए है।खतरा ये बना हुआ है कि कहीं विद्रोह सुक्खू के अपने खेमे में ही न भड़क जाए।
कांग्रेस व सुक्खू के पक्ष में इस बार ये जरूर है कि कांग्रेस आलाकमान किसी भी तरह के आंतरिक विद्रोह पर अभी से नजर रखे हुए है। जबकि पिछली बार कांग्रेस आलाकमान पूरी तरह से मुख्यमंत्री सुक्खू के भरोसे पर था। नतीजा ये हुआ था कि कांग्रेस पार्टी ने पूर्ण बहुमत होने के बावजूद राज्यसभा सीट तो हारी ही साथ सरकार की साख पर अलग से चोट पहुंची। गनीमत ये रही कि किसी तरह से सरकार बच गई।
हॉलीलाज को ठिकाने लगाना एजेंडा
कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल को अगर कांग्रेस पार्टी राज्यसभा भेजने में कामयाब हो जाती है तो सुक्खू अपनी इस मुहिम में हालीलाज कांग्रेस को एक बाद पुन: ठिकाने लगाने में कामयाब हो जाते है।अगर भाजपा लोटस टू करने में कामयाब हो जाती है तो भी सुक्खू हॉलीलाज कांग्रेस को पार्टी से बाहर करने के अपने एजेंडे में कामयाब होते नजर आ रहे है। तमाम परिस्थितियों पर नजर रख रहे पार्टी नेताओं का मानना है कि अगर हॉलीलाज कांग्रेस ने सही कदम उठाए और मुख्यमंत्री सुक्खू से अपना हिसाब पूरा करने की ठानी तो कांग्रेस सरकार को गिरने से कोई नहीं बचा सकता। इन नेताओं का मानना है कि बहुज कुछ हालीलाज कांग्रेस पर निर्भर है कि वो क्या सियासी चाल चलते है।
भाजपा व कांग्रेस में सभी जानते है कि सुक्खू खेमा किसी भी तरह से हालीलाज कांग्रेस को भाजपा में भेजने पर आमदा है व इसके लिए हर तरह की परिस्थितियां खड़ी की जा रही है। सुक्खू खेमे का मानना है कि ऐसा करने से प्रदेश कांग्रेस में सुक्खू खेमे का एकछत्र राज हो जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक आज की बैठक में भी विक्रमादित्य के मामले को लेकर बातचीत तो हुई है।नतीजा क्या निकलेगा ये महत्वपूर्ण है।
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