शिमला।सुक्खू सरकार के पंचायती राज मंत्री अनिरूद्ध सिंह की सल्तनत कसुम्प्टी विधानसभा के मैहली के गांव गोड़प गांव में तीखी ढलान पर हो रह निर्माण को लेकर नीचे रह रहे मकान मालिकों यानी पड़ोसियों ने अपनी सुरक्षा को खतरा बताते हुए इस मामले में कार्यवाही करने की मांग की है।शिकायतकर्ताओं के मुताबिक अगर होई हादसा हुआ तो इस निर्माण से करीब आधा दर्जन मकान खतरे की ज़द में आ जाएंगे।
उधर,ये मामला निदेशक टीसीपी तक भी पहुंच चुका है लेकिन इल्जा़म है कि मौके पर पंचायत विभाग की ओर से यानी बीडीओ की ओर से कोई भी कारगर कदम नहीं उठाए गए हैं।
भाजपा सांसद हर्ष महाजन के आवास के नजदीक लोअर पंथाघाट के सूरज निवास में रहने वाले बलबीर सिंह ने इस बावत बीडीओ मशोबरा को भेजी शिकायत में कहा है कि गोड़पा गांव में एक व्यक्ति की ओर से तीखी ढांक पर बिना टीसीटी विभाग की ओर से मंजूरी के यहां पर निर्माण किया जा रहा है। न कोई नक्शा और न ही बिल्डिंग प्लान कहीं से मंजूर कराया गया हैं। इसके अलावा उनकी जानकारी के मुताबिक पंचायती राज विभाग की ओर से भी कोई मंजूरी नहीं ली गई हैं।
याद रहे पंचायती इलाकों में पंचायतों को मकानों के निर्माण के लिए मंजूरी देने का जिम्मा दिया गया है। यहां पर भी नक्शा व प्लान जमा कराने का प्रावधान है।
उन्होंने बीडीओ मशोबरा को लिखा कि वो मौके पर निरीक्षण कर पूरी पड़ताल करे।
शिकायत कर्ताओं का इल्जाम है कि ये निर्माण ढांक पर हो रहा है और अगर कहीं कोई आपदा होती है तो नीचे बन रहे मकानों को खतरा हो जाएगा।जिससे यहां रहने वाले लोगों की जान भी खतरे में आ सकती है।
याद रहे 2023 में शिमला में बारिश की वजह से जगह-जगह जमीनें धंस गई थी और समरहिल और बाकी जगहों पर भारी जानमाल की हानि हुई थी। उसके बाद से प्रदेश में भारी बारिश का सिलसिला चला ही हुआ है और सरकार ने हर तरह निर्माण को लेकर कई कदम भी उठाए है। लेकिन जमीनी स्तर पर कहीं कुछ भी अमल में नहीं लाया जा रहा है।
अगर यहां पर शिकायतकर्ताओं के इल्जाम सही है तो मामला संगीन बन जाता है और सुक्खू सरकार की आपदा को लेकर संजीदगी कटघरे में खड़ी हो जाती है।
इस मामले को बीडीओ मशोबरा अंकिंत कोटिया शर्मा से बात की की गई तो उनने कहा कि इस मामले में 24 घंटों के भीतर संज्ञान ले लिया गया था और पंचायत सचिव और जेई को मौके पर भेजे गया था।
उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दी गई है उसके बयान लिए गए हैं।उसने ब्यान में कहा है कि वो अपनी जमीन पर मकान बना रहा है। उसने तत्कालीन ग्राम पंचायत पुजारली से 22 जून 2016 को निर्माण की अनुमति ली थी लेकिन निर्माणकार्य जनवरी 2026 से शुरू किया गया है। यहां ये दीगर है कि क्या अनुमति के दस साल बाद भी निर्माण की ये मंजूरी मान्य रहती है या नहीं।
उधर, ग्राम पंचायत मैहली के पंचायत सचिव की ओर से बीडीओ को भेजली रपट में साफ कहा है कि जब पंचायती राज विभाग की टीम मौके पर गई तो 2016 में ग्राम पंचायत पुजारली से पास कराए गए नक्शे मूल प्रति अवलोकन के लिए पेश नहीं की गई।
यही नहीं शिकायत कर्ता बलबीर सिंह ने यहां पर सैप्टिक टैंक की जगह ड्रम लगाए लाने का संजीदा इल्जाम भी लगाया है। विभाग की टीम को इस व्यक्ति ने कहा कि इसका घर साथ वाली जमीन पर भी बना है व इसके सैप्टिक टैंक में सारे घर के पाईप जाते है और वो जो नया घर बनाया जा रहा है उसका अलग से सैप्टिक टैंक बनाएगा। लेकिन शिकायत कर्ताओं का इल्जाम है कि मौके पर जो टीम आई थी उसे किसी और के घर का सैप्टिक टैंक दिखाया गया है।
हालांकि सचिव की रपट में भी कहा गया है बाथरूम या कोई अन्य पाइपलाईन स्पष्टरूप ये खुली हुई दिखाई दे रही है जो शिकायत कर्ता के इल्जामों की तस्दीक करती नज़र आ रही है।
सचिव ने अपनी रपट में ये भी कहा कि मौके वाले दिन शिकायत कर्ता मौके प मौजूद नहीं हुए इसलिए दोनों पक्षों का आमना-सामना नहीं हो पाया।
इस बावत बीडीओ मशोबरा शर्मा ने कहा कि शिकायतकर्ता पंचायत सचिव से संपर्क कर सकते है और वो जिस दिन मौके पर मौजूद रह सकेंगे वो दोबारा से टीम को मौके पर भेज देंगे ताकि शिकायतकर्ताओं के ब्यान भी दर्ज किए जा सके। इसके बाद मामले को आगे की कार्यवाही को आगे भेजा जा सकेगा।
उधर,शिकायतकर्ताओं का इल्जाम है कि जब टीम को नक्शा ही पेश नहीं किया गया तो निर्माण क्यों नहीं रोका गया। नक्शा पेश नहीं किया गया इस बावत सचिव की ओर से बीडीओ को जो रपट भेजी गई है उसमें भी जिक्र है।हालांकि कायदे से केवल ये आधार ही काम रोकने के लिए काफी था। विभाग को निर्माण के लिए ली गई मंजूरी और नक्शा हासिल करना चाहिए था लेकिन इस मामले में पंचायती राज विभाग की ओर से ऐसा नहीं किया जा रहा है।
इसके अलावा उर्वशी नामक शिकायतकर्ता ने उसके मकान को हाने वाली पानी की सप्लाई की पाईपों को उखाड़ने का इल्जाम भी लगाया गया है।
याद रहे पंचायती राज मंत्री अनिरूद्ध सिंह के विभाग में तमाम तरह के काम सवालों में है। नाजागढ़ की लग पंचायत में भ्रष्टाचार के मामले की शिकायतें तो कांग्रेस के ही पदधिकारियों ने की थी लेकिन वहां भी सरेआम मंत्री की नाक के नीचे लीपापोती हो गई थी। बाकी भी दर्जनों मामले है जहां पर सब कुछ सवालों के घेरे में है। मुख्यमंत्री सुक्खू समेत इस सरकार में अधिकांश मंत्री पहली बार मंत्री बने है,उन्हें शासन और कानून की गरिमा का लिहाज ही नहीं है। बहरहाल अब सरकार का डेढ ही साल बचा है।
(54)







