शिमला। प्रदेश के लोगों से आनलाइन ठगी करने वाले बाहरी राज्यों में बैठे ठगों को दबोचने के लिए प्रदेश खुफिया विभाग ने नौ राज्यों के पुलिस प्रमुखों से 382 मोबाइल नंबरोें की फेहरिस्त साझा की है। इन ठगों को पकड़ने के लिए राज्य पुलिस बाहरी राज्यों जैसे झारखंड भी गई लेकिन कुछ भी हाथ नहीं लगा।
इसके अलावा साइबर अपराध करने वाले ठगों ने अपने तौर तरीके भी बदल दिए है। ऐसे में ठगी करने वाली एक भी अपराधी को प्रदेश पुलिस आज तक पकड़ नहीं पाई है। प्रदेश साइबर अपराध ब्यूरो की ओर से की गई छानबीन में सामने आया है कि जिन खातों से लेन देन हुआ है उन खाता धारकों से इन ठगों ने उनके खातों को खरीद लिया था। असली खाताधारकों को मालूम ही नहीं था कि उनके खाते के नाम पर ठगी की जा रही है। अधिकांश ठग बिहार व झारखंड से अपना धंधा चला रहे है।
खुफिया विभाग के मुखिया एडीजीपी अशोक तिवारी ने नौ राज्यों के पुलिस प्रमुखों को लिखा है कि इन नंबरों से प्रदेश के लोगों को कॉल आ रही है और ठगी की जा रही है। जिन राज्यों के पुलिस महानिदेशकों को चिटठी लिखी गई है उनमें उतराखंड, पश्चिमी बंगाल, हरियाणा,महाराष्टÑ,बिहार, उतरप्रदेश, झारखंड, नई दिल्ली और अंडमान निकोबार शामिल है। इसके अलावा फोन सेवा प्रदाताओं के नोडल अधिकारियों से भी इन 382 नंबरों को साझा किया गया है। साइबर क्राइम ब्यूरों के मुताबिक राज्य साइबर अपराध के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से लेकर अब तक वितीय धोखाधड़ी की 276 शिकायतें पुलिस के पास पहुंच चुकी है।
डीएसपी साइबर अपराध नरबीर सिंह राठौर ने कहा कि जिन लोगों ने 24 घंटों के भीतर वितीय धोखाधड़ी की शिकायत साइबर पुलिस से की है उनके पैसे वापस उनके खातों में लौटाने में पुलिस ने मदद की है। भुगतान का एक गेटवे है। जो 24 घंटों तक पैसे वापस कर सकता है। राठौर ने कहा कि पुलिस गेटवे को इस धोखाधड़ी बारे जानकारी दे देता है व लेन देन रुक जाता है। पुलिस ने अब तक 50-60 लोगों के चार लाख के करीब वापस दिलाए है।
ठगी के तौर तरीके बदले
डीएसपी राठौर ने कहा कि शिमला से पुलिस झारखंड गई थी। वहां पर पता चला कि जिस व्यक्ति के खाते में पैसे गए थे व व्यक्ति पूरी तरह से अंपग है व बिस्तर पर है। उसका खाता ये ठग चला रहे है। इसी तरह उतर-पूर्व राज्यों से छात्र व छात्राएं बंगलूरू आदि पढ़ने चले जाते है। उनके खातों में ज्यादा पैसा नहीं होता। ऐसे में ये ठग उनके खाते खरीद लेते है और ठगी का धंधा चलाते है। राठौर ने कहा कि झारखंड में अब ये ठग लैपटॉप लेकर दुर्गम स्थानों से अपना धंधा चला रहे है ताकि पुलिस की पकड़ में न आए।
उन्होंने कहा कि ज्यादातर मामलों में इन ठगों ने फेसबुक के जरिए अपने लक्ष्य का चयन किया। इन्होंने मित्रता के लिए जाली प्रोफाइल बनाकर आग्रह किया और आभासी नंबर लेकर अपना ठगी का कारोबार शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि बर्चुअल नंबर एक ऐसी सर्विस है जिसे कोई भी खरीद सकता है व मोबाइल फोन व वाटसएप को उस नंबर पर इनेबल कर सकता है।
उन्होंने लोगोें से आग्रह किया वह वचुअल नंबर से कॉल आने पर उनके झांसे में न आए और किसी को भी अपने बैंक खातों का विवरण किसी भी स्थिति में न दे। अगर कोई ठगी का शिकार हो ही गया है तो तुरंत साइबर अपराध ब्यूरो को जानकारी दें।
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