शिमला। कांगड़ा कोआपरेटिव सेट्रेल बैंक में एफआइआर दर्ज होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब कांगड़ा बैंक के रिटायर डीजीएम केसी भारदवाज की शिकायत पर दलित उत्पीड़न अधिनियम के तहत एफआइआर दर्ज कर ली है। एफआइआर में बैंक के पूर्व एमडी और मौजूदा प्रशासक आइएएस विनोद कुमार समेत आठ बाकी अफसरों के नाम शामिल किए गए।
केसी भारदवाज ने बीते दिनों ही इस तरह की शिकायत एसपी कांगड़ा भेजी थी। इस शिकायत को कांगड़ा पुलिस ने एसपी को भेजा व एसपी ने कानूनी राय लेने के लिए डी्जीपी कार्यालय से पत्राचार किया।डीजीपी अशोक तिवारी के कार्यालय से कानूनी राय लेने के बाद डीजीपी ने इस मामले की सत्यता जानने के आदेश जारी किए तब जाकर कहीं ये एफआइआर दर्ज हुई ।
एफआइआर एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(q) के तहत दर्ज की गई है।
दावा किया जाता है कि विनोद कुमार सुक्खू सरकार के करीबी अफसरों में शुमार है और वो जनवरी महीने यानी इसी महीने के आखिर में सेवानिवृत भी हो रहे हैं। उनके व अन्यों के खिलाफ इससे पहले बैंक से कागजात गायब करने की एफआइआर ऊना में दर्ज हो चुकी है।
बीते दिनों बैंक से रिटायर हुए डीजीएम के सी भारदवाज ने बैंक प्रशासन पर उनका उत्पीड़न करने के इल्जाम लगाए थे । उनने कहा था कि उनको 2022 से ही उत्पीडि़त किया जा रहा हैं। वो 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत हुए और उनको 20 दिसंबर को बर्खास्त कर दिया। उन्हें अदालत ने बहाल कर दिया । वो 31 दिसंबर 2025 को बतौर डीजीएम सेवानिवृत हो गए लेकिन उनके रिटायरमेंट बाद के देय अदा नहीं किए गए।
इसके अलावा उनने बैंक के प्रशासक विनोद कुमार की बतौर प्रशासक नियुक्ति पर भी सवाल उठाए थे। उनने इल्जाम लगाया था कि जिन कृत्यों के लेकर सुक्खू सरकार ने केसीसी बैंक के निदेशक मंडल को भंग कर दिया था उसमें विनोद कुमार बतौर एमडी शामिल थे तो वो बैंक के प्रशासक कैसे हो सकते है। उनने बैंक के बाकी अफसरों के खिलाफ भी इल्जाम लगाए थे।
अब एफआइआर हो गई है देखना है कि अब पुलिस क्या कार्यवाही अमल में लाती है । याद रह गृह महकमा सुक्खू के अपने अधीन है।
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