शिमला। वामपंथी पार्टी माकपा ने सुक्खू सरकार के आला अफसर पर जिला सोलन में चैस्टर हिल कांड को अंजाम देने का इल्जाम लगाते हुए इस अफसर को तुरंत पद से हटाने,मामले की जांच विशेष जांच दस्ते यानी एसआइटी से कराने और इस तमाम संपति व जमीन को सरकार में शामिल कराने की मांग की है।
माकपा के राज्य सचिव संजय चौहान पूर्व माकपा विधायक राकेश सिंघा, राज्य सचिवालय के सदस्यों कुलदीप सिंह तंवर और विजेंद्र मेहरा ने राजधानी में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में एलान किया कि अगर कांग्रेस की सुक्खू सरकार ने इस मामले में कारगुजारियों को अंजाम देने वालों के खिलाफ कार्यवाही नहीं की तो माकपा सचिवालय का घेराव कर देगी।
वामपंथी पार्टी माकपा ने 275 बीघा भूमि के सैंकड़ों करोड़ रुपए के चेस्टर हिल घोटाले में शामिल हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव की घोटाले में कथित संलिप्तता के मद्देनजर प्रदेश सरकार से उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की है।
इन वामपंथी नेताओं ने दावा किया कि अगर इस मसले की गम्भीरता से जांच की जाए तो सोलन स्थित चेस्टर हिल के घोटाले का दायरा शिमला शहर तक पहुंचेगा व यह भयंकर घोटाला साबित होगा। पार्टी ने इस मसले की गम्भीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार से विशेष जांच दल (SIT) गठित कर निष्पक्ष जांच कर इसमें शामिल दोषियों के खिलाफ FIR की मांग की है।
सिंघा,चौहान,तंवर और मेहरा ने दावा किया कि प्रदेश में भू माफियाओं, रियल एस्टेट माफिया व उच्च अधिकारियों का गठजोड़ सक्रिय है और प्रदेशवासियों के हकों विशेष रूप से जल,जंगल जमीन को गैर कानूनी रूप से कब्जा कर रही हैं और अपना मुनाफा बढ़ा रहे हैं।
पार्टी ने अंदेशा जताया है कि ये जो भू माफिया या रियल एस्टेट माफिया प्रदेश में गैर कानूनी रूप से जमीन कब्जा रहे हैं कहीं इसमें हवाला या अन्य किसी गैर कानूनी रूप से कमाए गए पैसे तो नहीं लगाए जा रहे हैं। इस पहलू पर भी मुकदमा दर्ज कर इसकी जांच की जाए।
पार्टी ने चेताया है कि अगर इस घोटाले में दूध का दूध व पानी का पानी न किया गया एवं दोषियों को सलाखों के पीछे न धकेला गया तो पार्टी प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। पार्टी ने चैतावनी दी है कि दोषियों पर कार्रवाई न होने की स्थिति में पार्टी प्रदेश सरकार सचिवालय छोटा शिमला का घेराव करेगी।
पार्टी ने यह भी निर्णय लिया है कि पार्टी की एक टीम सोलन स्थित चेस्टर हिल व स्थानीय जनता के बीच जाकर इस घोटाले की अपने स्तर पर छानबीन करेगी और भ्रष्टाचार को बेनकाब करेगी। पार्टी मांग करती है कि मुख्यमंत्री द्वारा सदन में जो बयान दिया गया है कि प्रदेश में जो अधिकारी संदिग्ध प्रमाणिकता वाले हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री अपनी इस मंशा को लागू कर मुख्य सचिव को तुरन्त हटाएं और इस मामले में मुकदमा दर्ज करें।
संजय चौहान व राकेश सिंघा ने दावा किया कि प्रदेश में रियल एस्टेट के नाम पर भू माफिया सक्रिय है और सरकार में कुछ उच्च अधिकारी इनके साथ मिलकर व्यापक भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे है। उन्होंने कहा कि चेस्टर हिल घोटाले में प्रदेश सरकार की अफसरशाही के सबसे बड़े अधिकारी मुख्य सचिव स्वयं संलिप्त हैं। इस अधिकारी पर राजस्व सचिव रहते हुए भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे तथा वह एक अन्य मामले में पहले गिरफ्तार तक हो चुके हैं।
चेस्टर हिल घोटाले में नगर निगम सोलन आयुक्त एवं मंडल एसडीएम व तहसीलदार की दो जांचों को दरकिनार करके मुख्य सचिव द्वारा क्लीन चिट देने से स्पष्ट हो गया है कि पूरी दाल ही काली है। इस मसले पर जिलाधीश की निष्क्रिय कार्यप्रणाली भी कई सवाल खड़ा कर रही है। मुख्य सचिव द्वारा जिलाधीश व जिला के न्यायिक अधिकारी की भूमिका को अपने पास केंद्रित करने से स्पष्ट है कि वे स्वयं पूरे घोटाले के सूत्रधार हैं। उनका स्वयं अग्रिम पंक्तियों में रहकर घोटाले को क्लीन चिट देना पूरी तरह से नगर निगम अधिनियम, 1994 व हिमाचल प्रदेश किरायेदारी एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1972 का सीधा सीधा उल्लंघन है। उनके इन कृत्यों द्वारा धारा 118 को कमजोर किया जा रहा है व धारा 118 की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्रदेश में भू माफिया सक्रिय है।
इन वामपंथी नेताओं ले कहा कि न तो मुख्य सचिव को नगर निगम अधिनियम, 1994 और न ही हिमाचल प्रदेश किरायेदारी एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1972 में हस्तक्षेप करने का कानूनी अधिकार है। इसका स्पष्ट नाता नौकरशाही, ठेकेदारों, रियल एस्टेट व राजनीतिज्ञों से गठजोड़ है। इस गठजोड़ के कारण प्रदेश में बेनामी सौदे हो रहे हैं। गरीब किसानों की जमीनों को कौड़ियों के भाव हड़पा जा रहा है। धारा 118 को पूर्व की भाजपा व वर्तमान कांग्रेस सरकार ने लगातार कमजोर किया है ताकि भू माफिया व रियल एस्टेट के जरिए भारी कमीशनखोरी व जमीनें हड़पने का कार्य किया जा सके। धारा 118 को कमजोर करके व इसे हाशिए पर धकेल कर प्रदेश व किसानों के हितों से खिलवाड़ किया जा रहा है। प्रदेश सरकार की खामोशी कई प्रश्न खड़ा कर रही है।
याद रहे इस मामले में पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता विनय शर्मा ने भी छोटा शिमला थाना में एफआइआर दर्ज कराने की मांग को लेकर शिकायत दी है।
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