शिमला ।993 से लेकर 1998 तक सता में रही तत्कालीन वीरभद्र सिंह नीत कांग्रेस सरकार के दौरान हजारों लोगों को चिटों पर दे दी गई नौकरी घोटाले मामले में हाईकोर्ट ने विजिलेंस के जांच अधिकारी को एक जुलाई को अदालत में व्यक्तिगत तौर पर हाजिर रहने और अब तक की गई जांच का सारा ब्यौरा लेकर आने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि जब से हाईकोर्ट ने इस मामले कीमॉनिटरिंग करनी छोड़ी है तब से इस मामले में कोई जांच नहीं हो रही है।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस कुलदीप सिंह ने अपने आदेश में कहा कि सरकार नवंबर 2005 से अब तक की गई जांच के नेचर का चार्ट भी तैयार रखे। ताकि अदालत उसका संज्ञान ले सके।
1993 से 1998 तक चिटों पर हुई्र भर्तियों के मामले की 1998 में सता में आने के बाद दो आईएएस अफसरों अवय शुक्ला और हर्षगुप्ता से जांच करवाई थी। इन दोनों अफसरों ने अपनी रिपोटर्स में चिटों में भर्ती होने का खुलासा किया था। धूमल सरकार ने रिपोर्ट मंजूर करने के बाद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की थी इसके बाद 2003 में धूमल की सरकार सता से बाहर हो गई और वीरभद्र सिंह ने सता में आने के बाद अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड हमीरपुर में धूमल के कार्यकाल के दौरान हुई भर्तियों की जांच करवाई और बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष सुरेंद्र मोहन कटवाल को अरेस्ट करवा दिया था।
इस बीच एक साप्ताहिक समाचार पत्र शैल में हर्ष गुप्ता और अवय शुक्ला की रिपोर्ट किश्तों में प्रकाशित हो गई। कटवाल ने इस साप्ताहिक में छपी रिर्पोटर्स को आधार बनाकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट के तत्कालीन जस्टिस वीके झांझी और कुलदीप सूद ने इस मामले की विजिलेंस जांच करने के आदेश दिए थे। अदालत ने अपने आदेशों में कहा था कि इस मामले की जांच एसपी स्तर का अफसर करे।
नवंबर 2005 से लेकर अब तक इस मामले की जांच में बहुत कुछ नहीं हुआ है। इस बीच2003 से 2008 तक प्रदेश में वीरभद्र सिंह नीत कांग्रेस सरकार सता में रही। उसके बाद 2008 से लेकर 2012 तक प्रदेश में बीजेपी की धूमल नीत सरकार सता में रही। लेकिन किसी भी सरकार ने इस मामले को आखिर मंजिल तक नहीं पहुंचाया। हाईकोर्ट ने इसी बात का संज्ञान लिया है।
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